Tuesday, March 13, 2007

क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र, उदयपुर का कैनवास


क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र, उदयपुर मेरे लिये कुछ वैसी याद है कि मैं वृहद कैनवास पर कोई चित्र बना रहा होऊं. अथवा कोई बडी़ कविता लिख रहा होऊं. लिखने या चित्र बनाने की प्रक्रिया तो रोचक होती है, पर अगर एक दशक बाद उस याद में कुछ लिखने को कहा जाये, तो मेमोरी ट्रिगर होने में समय लगता है.
मैं ZTC (उस समय इसे यही कहते थे) में तब आया जब परिचालन की नौकरी में "बर्न आउट" महसूस कर रहा था. मैडल और शील्ड पाने का जोश; उच्च रक्तचाप, थकान और वजन में बढोतरी (जो उदयपुर में हाइप- थायराइडिज्म पाई गई) के कारण दब चुका था. यहां पोस्टिंग पाने के लिये मैने COM महोदय से बडी़ चिरौरी की थी.
उदयपुर में जगह और लोग दोनो अच्छे लगे. एक संस्थान का प्रबंधन, जिसकी अपनी पहचान रही हो, बडा़ प्रिय अनुभव था. उसका नोस्टाल्जिया मुझे अब भी है. अब भी अगर कोई अवसर दे तो मैं पुन: उसी पद पर फिर आने को आतुर होऊंगा.
उदयपुर का केम्पस, अमलतास और गुलमोहर के वृक्षों की कतारें; भवन, कक्षायें और मॉडल रूम की सफाई व सज्जा किसी अंश मे मेरे व्यक्तित्व में स्थाई हो गये हैं.
मेरे बाद भी प्राचार्यों ने संस्थान में बहुत कुछ किया होगा. मेरे साथ के लोगों के अनुभव होंगे. वह सब देखने व सुनने का मन करता है. शायद कभी फिर जाने का अवसर मिले...

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