Saturday, March 31, 2007

The articulate Union Leader

We were having PREM meeting chaired by the North Central Railway General Manager. The meeting is for participation of employees in the management. The Union President proved to be excellent speaker. When cornered on the matter that his one division unit was at logger-head with the other division units; he took little time to get composed. And he wriggled out so well:
  • साहेब, हम लोग तो समाजवादी हैं. लड़ना हमारे खून में है. पहले बाहर वालों से लड़ते हैं. न मिलें तो आपस में लड़ते हैं. यहां तक कि कमी पडे़ तो घर आकर पत्नी से लड़ते हैं. इसलिये इसे तवज्जो न दीजिये. (Sir we are socialists. Fighting is in our blood. First we fight with outsiders. If they are not there we fight among ourselves. If some stamina is left, then we come to home and fight with wife also. So do not give it much thought.)
The Union has made him the President, not without reasons. Diplomacy is the art practiced by all leaders - may be Union leaders.

Tuesday, March 20, 2007

Death refused to give me a small win for Golu.

Golu was my pet for the last 7 years. He was instrumental in saving us from deep despair in those dark days when we were fighting the battle against the imminent death of our son. He was the symbol of love and hope for us. His energy and affection was a source of inspiration. A pet can be so valuable for our emotional life...
He went away to eternity yesterday. With his damaged liver, body getting all the toxins and Golu refusing to take the food or the medicines orally, we had slender chance of saving him. Injections prolonged his life only for a few days.
still, I did not want to give in easily. In the early morning hours we took him in a rickshaw to
Vet-Hospital. We talked to the doctor and persuaded to come to the hospital immediately. Golu was not moving even his eyelids. His temperature was dropping. He was barely breathing. The medical attention made some minor difference. We brought him home and in 1 1/2 hours he was gone beyond the body limits. Death did not give me a chance to win the battle for his life even for a few days.
Golu or Golu Pandey (he was son to me) will live in my memories forever.
(In picture: last attempts to save Golu)

Tuesday, March 13, 2007

क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र, उदयपुर का कैनवास


क्षेत्रीय प्रशिक्षण केन्द्र, उदयपुर मेरे लिये कुछ वैसी याद है कि मैं वृहद कैनवास पर कोई चित्र बना रहा होऊं. अथवा कोई बडी़ कविता लिख रहा होऊं. लिखने या चित्र बनाने की प्रक्रिया तो रोचक होती है, पर अगर एक दशक बाद उस याद में कुछ लिखने को कहा जाये, तो मेमोरी ट्रिगर होने में समय लगता है.
मैं ZTC (उस समय इसे यही कहते थे) में तब आया जब परिचालन की नौकरी में "बर्न आउट" महसूस कर रहा था. मैडल और शील्ड पाने का जोश; उच्च रक्तचाप, थकान और वजन में बढोतरी (जो उदयपुर में हाइप- थायराइडिज्म पाई गई) के कारण दब चुका था. यहां पोस्टिंग पाने के लिये मैने COM महोदय से बडी़ चिरौरी की थी.
उदयपुर में जगह और लोग दोनो अच्छे लगे. एक संस्थान का प्रबंधन, जिसकी अपनी पहचान रही हो, बडा़ प्रिय अनुभव था. उसका नोस्टाल्जिया मुझे अब भी है. अब भी अगर कोई अवसर दे तो मैं पुन: उसी पद पर फिर आने को आतुर होऊंगा.
उदयपुर का केम्पस, अमलतास और गुलमोहर के वृक्षों की कतारें; भवन, कक्षायें और मॉडल रूम की सफाई व सज्जा किसी अंश मे मेरे व्यक्तित्व में स्थाई हो गये हैं.
मेरे बाद भी प्राचार्यों ने संस्थान में बहुत कुछ किया होगा. मेरे साथ के लोगों के अनुभव होंगे. वह सब देखने व सुनने का मन करता है. शायद कभी फिर जाने का अवसर मिले...

Thursday, March 01, 2007

और फरवरी भी समाप्त


एक महीना और चला गया. काम कुछ हुआ, ज्यादा बाकी रहा. जो बाकी रहा वह समय के साथ irrelevant हो जायेगा. जो कुछ हुआ वह इतिहास का हिस्सा हो जायेगा.
इस महीने बहुत से ब्लॉग देखे. कुछ प्रयोग स्वयं भी किये. हिन्दी में यूनीकोड से IME द्वारा लेखन प्रारम्भ किया. हिन्दी का प्रयोग इससे बढ़ेगा. शायद जो कुछ अंगरेजी में सोच कर लिखा जा रहा था, वह फिर से हिन्दी में सोचना प्रारम्भ हो सकेगा.
जरूरी वही है. लिखने से ज्यादा जरूरी है भाषा सोच का माध्यम बने. भले ही F11 कुन्जी के माध्यम से सोच द्विभाषी हो, पर उसमें हिन्दी का अंश बढे तो. (फोटो में २८ फरवरी को सवेरे शिवकुटी मंदिर के पास गंगा नदी का सवेरा.)