Thursday, February 22, 2007

हिन्दी मे ब्लॉग का प्रयोग


बडा झंझटिया काम है हिन्दी मे ब्लॉग लिखने को कमर कसना. एक तो नालेज नही. ब्लॉगरों का बढिया लेखन देख कर मन ललचता है अपना भी कुछ ‘मस्त’ लेखन इंटर्नेट पर चस्पां करने का. दूसरे जिन्दगी भर रेल गाडी हांकी. अब अपने स्टेनो को परे कर हिन्दी को रोमनागरी में पहली दरजे के बच्चे जैसे लिखना – वह भी रात के 11 बजे – जब पत्नी खर्राटे ले रही हो; आप समझ सकते हैं इस जुनून को?
बस जैसे तैसे ये लाइनें काट-चिपका कर ब्लॉग पर पोस्ट करता हूं. पता नहीं दूसरों को नजर भी आयेगा या कीडे-मकौडे दीखेंगे ब्लॉग पर...
कल मुन्ना से पता करूंगा कैसा दिखता है.

3 comments:

उन्मुक्त said...

बहुत अच्छा लिखा है। हिन्दी में लिखना कुछ भी झंझटिया काम नहीं है। शुरू हो जाइये।

Shrish said...

पहले यहाँ टिप्पणी करने वाला था फिर आपके दूसरे चिट्ठे पर कर दी

ePandit said...

आज आपकी इस पोस्ट पर दोबारा आना हुआ। जरा एक पोस्ट इसी पर लिख दीजिये कि तब की तुलना में हिन्दी लिखने में अब कितना आराम महसूस करते हैं।